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Raat Andhiiyari hai : lata mangeshkar

lata mangeshkarBy .Sri Ganti
The 1999 RMIM meet commemorative was a tribute to Lata Mangeshkar on the ocassion of her 70th birthday. One of the songs in the compilation was Sudhir Phadke’s duet with Lata “kismat ka nahiindosh baanvare”. Vish Krishnan, in his commentary mentioned the list of albums in which they partnered “Murliwala, Maltimadhav, Gokul Ka Chor, Pehli Tarikh, Ratnagahar, Sajni and Bhabhi Ki Chudiyan”. Songs like “baandh preeti phuul Dore”, “jaa re chandr” were being discussed on RMIM around that time. That was how my fascination for Babuji began and I started looking around for more of his songs.

An year later I found a job in Chicago. Those were the days when I had just learned driving but was a little scared to drive on the highways. Dr. Arunabha Roy had invited me over to his place, and promised to give me a tape of rare Lata songs. So I gathered a little courage and ventured onto I-90 and went to University of Chicago. Arunabha revealed that the tape he was referring to was a compilation of Suhdir Phadke songs that Dr. Mandar Bichu graciously shared it with him. The compilation was an instant hit and I just fell in love with the melodies. I just cudn’t get some of the songs out of my head and ended up posting the lyrics on RMIM. The song selected today is among that special set. The opening line “raat andhiyaari hai” sets the tone for this melancholy nocturne.Lata emphasies “raat” and “andhiyaari” as if the night is very long and very dark.
sukh se tuu so mere praaN, mere maaN, mere rain ke vihaaN .The song oozes maternal love which is epitomised by the line sukh se tuu so mere praaN, mere maaN, mere rain ke vihaaN Every time praaN, maaN or vihaan are rendered, the emotion is so perfectly captured that one can visualise the the love showered by the mother on her child .

 

The other recurring emotion in the song is sadness. In the second antara the word “andhkaar” is repeated to cascading effect taking darkness to new heights. Pandit Narendra Sharma’s lyrics are a constant with Sudhir Phadke’s music and the following line takes the cake for me. aa.Nsuuo.n ke motiyo.n kii tuu hai musakaan The orchestration is soft, subtle and soothing. It complements the theme very well and elevates the song to a treasure that can be cherished for a lifetime.

Movie: Sajni (1956)
Singer: Lata
Lyrcis: Pandit Narendra Sharma
Music: Sudhir Phadke

Youtube Link: here
picture courtesy : Kaustubh pingle and lavanya shah ji
( originally written for cinema sangeet)

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Posted by on April 1, 2013 in Articles, pictures

 

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Kani baaju amol bol bauji

This post is written by Nihar Ranjan

जो गीत मैं साझा करने जा रहा हूँ उसे सुमन कल्याणपुर और उषा टिमोथी ने स्वर दिया है. यह गीत मैथिली में सबसे पहली बनाई फिल्म “ममता गाबय गीत” से है. इस फिल्म के बनाने से सिनेमाघरों तक आने में पूरे १९ साल लगे. १९६२ में शुरुआत से लेकर १९८१ में सिनेमाघरों तक आने में इसे कई तरह के झंझावातों का सामना करना पड़ा. उसके निर्माण की एक लम्बी कहानी है जिसके प्रामाणिकता की जांच में लगा हुआ है और सही सूचना आने पर उसे साझा करूँगा. इसके निर्माण की कहानी बहुत रोचक है और उससे भी रोचक इसका संगीत है जिसके मधुरता के मापदंड पर आजतक मैथिली की कोई फिल्म नहीं उतर सकी..

pic courtesy : shyam ji

pic courtesy : shyam ji

विडम्बना ये की की इस फिल्म का विडियो कैसेट भी उपलब्ध नहीं है. इसलिए मेरे जैसे कई लोग तरस रहे हैं इसे देखने के लिए. वो तलाश शायद कुछेक वर्षों में पूरी हो जाए. बचपन से घर पर इसके गीतों की मधुरता के बारे में सुना था और गीत के जो बोल सुने थे वो बस परिवार के लोगों की जुबान से. कई सालों से कोशिश से लगा था इसके गीत सुनने के लिए. घर से दूरी ने इस खोज को और दुरूह बना दिया. इस दरम्यान दो गीत इन्टरनेट पर आये. एक गीता दत्त का गाया हुआ (अर्र बकरी घास खो) और दूसरा सुमन कल्याणपुर का गाया हुआ एकल गीत (भैर नगरी में शोर). शेष गीतों को सुनने की उत्कट लालसा मन में बनी रही और आखिरकार मित्र अरविन्द मिश्र ने अथक प्रयास के बाद कैसेट (जिसकी रील टूटी फूटी थी) पाने में सफलता पायी. उन्हीं के प्रयासों के यह नतीजा है की अब इस फिल्म के सारे गाने उपलब्ध है. इस परिश्रम और आनंद भेंट का आभार व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं.

फिल्म के गीत लिखे थे मिथिला के प्रसिद्द गीतकार रविन्द्रनाथ ठाकुर ने और संगीत दिया था श्याम शर्मा (सागर) ने. इस गीत में ननद (किसी स्त्री के पति की बहन )-भौजी (भाभी) से मीठी नोंक झोंक कर रही है. उत्तरी बिहार (मेरा ख़याल है उत्तरी भारत के अधिकांश हिस्से में ऐसा ही रिवाज़ है) में ननद—भौज का संवाद मीठे तकरारों के लिए जाना जाता है जिसमे अक्सर वो एक दूसरे के की अच्छी चीजों को भी बुरा कह कर चिढाते हैं. जिसमे बस मिठास ही मिठास होता है और कडवाहट नाममात्र भी नहीं. इसमें जिनका मज़ाक उड़ाया जाता है उसके मुख्य किरदार समधी-समधिन और सास-ससुर होते हैं. इस गीत में दो ननद अपनी नयी-नवेली भौजी से कुछ बोलने (जो लज्जावश चुप हैं ) को कह रही हैं. और आखिरकार जब उनका प्रयास विफल रहता है तो दोनों ननदें कह जाती है है जब इनके पिता ही “बौक (मूक)” तो “धीया(बेटी)” की क्या गिनती. भाभी के पिता पर इसी तंज़ के साथ गीत वहीँ खत्म हो जाता है.

मैथिली के इस गीत को देवनागरी में नीचे लिखने का प्रयास किया है साथ ही उसका हिंदी में सरल भाव-अनुवाद.

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pic courtesy : Usha Timothy

कनी बाजू अमोल बोल भौजी
(भाभी जरा अपने मुख से अनमोल शब्द तो निकालिए )

कहू लेब कोन गहना
(कहिये कौन सा गहना चाहिए इसके लिए (उपहार स्वरुप))

कनी ताकू उठाई दुई नैना
(जरा दोनों नैन उठाइए तो सही)

ननद केर नेह नपना
(ननद की आँखें तो निहारिये)

कनी बाजू, हे कनी बाजू ……
(भाभी जरा अपने मुख से अनमोल शब्द तो निकालिए )

रान्हब खीर, पकायब पूरी, संग खुयायब हलवा
(खीर, पूरी पकाऊंगी, साथ ही हलवा भी खिलाऊँगी)

नाच नाच के हम खेलायब एक अहिं संग फगुआ
(नाच-नाच के आपके साथ होली भी खेलूंगी )

अहिं से बनायब जूड़ा लगाय नित लाल फुदना
(आपसे ही अपने जूड़े के फुदना (परांदा) भी लगवाऊंगी (ये ननद-भौजी के प्रेम की निशानी है))

कनी बाजू, हे कनी बाजू
कनी बाजू अमोल बोल भौजी
कहू लेब कोन गहना
कानी ताकू उठाई दुई नैना
ननद केर नेह नपना
(भाभी जरा अपने मुख से अनमोल शब्द तो निकालिए.. )

बुईझ पडैत छेत अहाँ जनए छी कामरूप के जादू
(ऐसा प्रतीत होता है आपको कामरूप के जादू जानती हैं)

अजगुत कहब हम भौजी चाहे थापर मारू, चाहे थापर मारू
(एक अजीब बात कहती हूँ भौजी भले ही थप्पड़ मारें आप मुझे )

राखी भैया के कोने पिटारी लगाय देब कोन झपना
(भैया के पिटारी के ढक्कन की अदला बदली कर दूंगी (किसी रिवाज़ की बात हो रही है )

कनी बाजू, हे कनी बाजू
कनी बाजू अमोल बोल भौजी
कहू लेब कोन गहना
(भाभी जरा अपने मुख से अनमोल शब्द तो निकालिए.. )

आब ने बेसी करब खुसामद बजबा के हो बाजू-२
(अब मैं ज्यादा खुशामद नहीं करुँगी जो बोलना हो सो बोलिए)

रूस जायब हम अहाँ नहीं गाल फुलायब पाछू
(अगर मैं रूठ गयी तो पीछे आप मुंह मत चिढाना.. (फिर भी भौजी नहीं बोलती है) )

जखन बापे आहाँ के बौके तै धीया के कोन गनना
( जब आपके पिता ही मूक है तो आपसे और क्या उम्मीद की जा सकती है)

कनी बाजू अमोल बोल भौजी
कहू लेब कोन गहना
(भाभी जरा अपने मुख से अनमोल शब्द तो निकालिए.. )

आप सबकी नज़र रहा ये गीत.
कनी बाजू, हे कनी बाजू

 
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Posted by on February 3, 2013 in Articles

 

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yaadon ke jharokhe se

pic courtesy : Dinesh ji

pic courtesy : Dinesh ji

This post is written by deepak jeswal

How you became SJ Fan?The process is a little difficult to define. I guess you just instinctively like something. In the last question, I replied Sanyasi songs had a huge reference. I should have mentioned Sangam too. Sangam is one of the two LP records that I recall used to play a lot at my place when I was around 7-8 years. Aarzoo’s Bedardi baalma tujhko, is another song that somehow jumps out from those days (we weren’t in India at that time). All Lata Mangeshkar, by the way. That’s the voice which I was drawn too. But then, all SJ as well for the music part. Remember, Lataji was present in all heroine songs ( if I view from a 7-year old’s perspective), but these few from SJ are firmly etched.When dad bought me a ‘dictafone’, what I recall is having Sanyasi songs recorded in it (by placing the player in front of the tv while watching the film on VCR), and also Sangam, (same process, but with the LP player). So I now ‘owned’ these two album songs, in my tiny dictafone cassettes.Leap forward a few years, returned to Delhi, while watching one Chitrahaar, Kathputli’s ‘Bol ri kathputli’ came on. And my memories are razor sharp there. I was lying on the couch. And with that song I just jumped up. Of course, again Lata Mangeshkar, but interlude music had me very ecstatic.

Fast forward more years. College and post-grad. Building my own personal collection. All I did in those years, browse music shops, get SJ films cassettes (other than contemporary stuff): Kanhaiya/Mai Nashe Mein Hoon, Hariyali Aur Raasta, Dil Ek Mandir/Dil Apna Preet Paraayi, Singapore, Anari/Chori Chori, Amrapali, Saanjh Aur Savera/Ek Dil Sau Afsaane, Shikast/Poonam are a few I recall.

pic courtesy :kaustub

pic courtesy :kaustubh pingle

It’s their interludes that had me excited & exhilirated. I would so often just wait for the interlude orchestration to begin, because it is so rich, so full of music & the recording tenor is just so right.

So of all the ones I listed above, I am posting the Kathputli song for this question.

http://www.youtube.com/watch?v=pRhZgkUlBoQ

 
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Posted by on February 3, 2013 in Articles

 

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