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C.Ramchandra Live at BBC Studios,Birmingham, UK 1981

C.Ramchandra Live at BBC Studios,Birmingham ,UK 1981

C.Ramchandra Live at BBC Studios,Birmingham ,UK 1981

सी रामचन्द्र या चितलकर. फिल्म में आये  1932 के करीब . ये दौर था ‘साइलंट’ फिल्मों का .
पर शुरूआती सफर उन्होंने संगीतकार के तौर पर नही बल्कि हीरो के तौर पर फिल्म nagand
(नागानन्द ) से शुरू किया . जिसमे वो बतौर हीरो आये. किन्हीं वजहों से फिल्म तो चली नहीं सो इन्होने अपना पेशा बदल लिया .

फिल्मों में आना और खास कर संगीतकार बनने का उन्हें कोई शोक नहीं था .ये तो एक तरह से उनके पिता का शौक रहा . उन्होंने रामचन्द्र  को संगीत सिखाना शुरू किया .सी रामचंद्र संगीत में भले ही काफी मकबूल हुए पर सी रामचंद्र के मुताबिक वो पढाई में इतने अच्छे  नहीं थे .

सी रामचंद्र को राग बागेश्वरी ज़्यादा प्रिय राग था ,इतना कि उन्होंने कई रचनाएँ ही राग बागेश्वरी में बनानी शुरु कर दी .उनके मुताबिक ये राग उन्हें बाकी रागों से आसान लगता था और अमूमन जब कभी कोई राग पर आधारित गीत की रचना होती तो सबसे पहले इसी राग को चुना करते .

परछाइयाँ – मोहोबत ही न जो समझे  –तलत महमूद .सोज़ भरे इस गीत की रचना उन्होंने 50 के दौर में की .और ये तर्ज़ आज भी अपनी खूबसूरती बरकरार रखे हुए है .

सी रामचंद्र काफी नरम खुशमिजाज स्वभाव के व्यक्ति रहे .

1972 के करीब -करीब संगीत जगत से बतौर संगीतकार उन्होंने अलबिदा के लिया .

हर संगीतकार किसी न किसी गीत/धुन से प्रेरित होता है .सी रामचन्द्र भी हुए .पर एक बार कुछ ऐसा हुआ कि एक धुन को इमप्रूव नहीं कर पाए इसलिए सी रामचंद्र के मुताबिक उन्होने उस गीत को उसी धुन पर पिरोना सही समझा .

फिल्म थी सरहद  और गीत था ,आजा रे आजा लागे न मोरा जिया ..


(C Ramchandra has acknowledged that this song is a copy of dean martins’ song Volare in his interview. He even said that this is the only song where he could not change even a single note from the original song )

वहीँ बात करें राग मालकौंस की तो इस राग पर आधारित एक था –फिल्म नवरंग से

‘आधा है चन्द्रमा रात आधी’ 

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Posted by on September 23, 2012 in Articles, pictures

 

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